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चित्तौड़गढ़ को मिलेगा नया बायोलॉजिकल पार्क, दुर्ग परिसर से हटकर तलहटी में भेजा प्रस्ताव

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चित्तौड़गढ़ को मिलेगा नया बायोलॉजिकल पार्क, दुर्ग परिसर से हटकर तलहटी में भेजा प्रस्ताव

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मृगवन पर ASI की रोक के बाद वन विभाग ने नई लोकेशन की ओर बढ़ाए कदम
चित्तौड़गढ़, 5 फरवरी:
चित्तौड़गढ़ शहरवासियों और पर्यटकों को बायोलॉजिकल पार्क की सौगात देने की दिशा में वन विभाग ने नई पहल की है। दुर्ग परिसर में स्थित मृगवन को विकसित करने की योजना पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रोक के बाद अब दुर्ग की तलहटी में नई लोकेशन पर पार्क विकसित करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है।
तलहटी में 35 हेक्टेयर क्षेत्र में नया प्रस्ताव
वन विभाग ने गांधीनगर स्थित स्मृति वन से मोहर मंगरी तक दुर्ग की तलहटी में करीब 35 हेक्टेयर क्षेत्र में बायोलॉजिकल पार्क विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। यह इलाका हरियाली से घिरा हुआ है और स्मृति वन के पीछे से सीधा व सुगम रास्ता उपलब्ध होने से इसे पर्यटन की दृष्टि से भी उपयुक्त माना जा रहा है। विभाग का मानना है कि यह स्थान वन्यजीवों के लिए अनुकूल प्राकृतिक वातावरण प्रदान करेगा।
दुर्ग के मृगवन पर हमेशा के लिए लगा विराम
चित्तौड़गढ़ दुर्ग परिसर में स्थित मृगवन को बायोलॉजिकल पार्क के रूप में विकसित करने का सपना अब पूरा होता नजर नहीं आ रहा। ASI ने स्पष्ट कर दिया है कि विश्व धरोहर दुर्ग क्षेत्र में किसी भी प्रकार का नया निर्माण या विकास कार्य नियमों के तहत संभव नहीं है। इसके चलते मृगवन से जुड़ी उम्मीदों पर विराम लग गया।
9 साल से बंद पड़ा मृगवन
करीब 35 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला मृगवन पिछले 9 वर्षों से बंद है। 26 अगस्त 2016 को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने पंजीकरण नहीं होने के कारण इसे बंद करने के आदेश दिए थे। इसके बाद पर्यटकों का प्रवेश पूरी तरह रोक दिया गया और यह क्षेत्र धीरे-धीरे उजाड़ होता जा रहा है।
1971 में हुआ था रिलोकेशन सेंटर के रूप में शुभारंभ
मृगवन की स्थापना 4 अप्रैल 1971 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया ने की थी। इसका उद्देश्य सांभर, चीतल जैसे वन्यजीवों का संरक्षण और उनके वंश को बढ़ाकर अभयारण्यों में भेजना था। यहां वन्यजीव खुले क्षेत्र में विचरण करते थे, न कि पिंजरों में।
मान्यता के प्रयास में हुई गलती, बंद हुआ केंद्र
1993 में बजट की उम्मीद में अधिकारियों ने इसे चिड़ियाघर की मान्यता दिलाने का प्रयास किया। यही गलती भारी पड़ गई। 2016 में केंद्रीय प्राधिकरण ने निर्देश दिए कि यह चिड़ियाघर की श्रेणी में नहीं आता और यहां से वन्यजीव हटाकर इसे बंद किया जाए। तभी से मृगवन पर ताले लगे हैं।
नई लोकेशन पर टिकी उम्मीदें
सांसद सीपी जोशी ने वैकल्पिक स्थान तलाशने के निर्देश दिए थे। इसके बाद अब दुर्ग की तलहटी में नया प्रस्ताव भेजा गया है। डीएफओ राहुल झांझरिया के अनुसार यह क्षेत्र हरियाली से भरपूर है और वन्यजीवों के लिए बेहतर रहेगा। अब सबकी नजरें सरकार और आगामी बजट पर टिकी हैं कि चित्तौड़गढ़ को यह नया प्राकृतिक पर्यटन स्थल कब मिलेगा।

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