दीक्षांत शिक्षा का अंत नहीं, जीवन की नई शुरुआत है: राज्यपाल बागड़े
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एमएलएसयू के 33वें दीक्षांत समारोह में 255 शोधार्थियों को पीएचडी, 109 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक
उदयपुर, 21 दिसम्बर: शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि आजीवन सीखते रहने और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों के निर्वहन की प्रेरणा है। यह विचार राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के 33वें दीक्षांत समारोह में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि दीक्षांत शिक्षा की समाप्ति नहीं, बल्कि जीवन की नई शुरुआत है, जहां से विद्यार्थी अपने ज्ञान का उपयोग मानवता और राष्ट्रहित में करते हैं।
रविवार को आरएनटी मेडिकल कॉलेज सभागार में आयोजित समारोह में राज्यपाल बागडे ने शैक्षणिक सत्र 2024 के अंतर्गत विभिन्न संकायों के 255 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि तथा 109 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय के नवनिर्मित फार्मेसी भवन का डिजिटल उद्घाटन भी किया।
राज्यपाल ने प्राचीन गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले गुरु और शिष्य एक परिवार की तरह रहते थे, जिससे छात्र का सतत मूल्यांकन और सर्वांगीण विकास संभव होता था। उन्होंने तैत्तिरीय उपनिषद् का संदर्भ देते हुए कहा कि धर्म का अर्थ कर्तव्य का पालन है और विद्यार्थी को सदैव सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए। आजीवन नया सीखते रहना ही विद्यार्थी का सच्चा कर्तव्य है।
उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की कम पहुंच पर चिंता जताते हुए कहा कि शिक्षा ही गरीबी दूर करने का सबसे सशक्त माध्यम है। परिवार में एक व्यक्ति के शिक्षित होने से पूरी पीढ़ी का भविष्य बदल जाता है, इसलिए वंचित वर्ग को शिक्षा से जोड़ना जरूरी है। मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा में संस्कारों और स्थानीय इतिहास का समावेश होना चाहिए।
दीक्षांत शिक्षक, अभिभावक और संस्थान का सामूहिक समर्पण : कटारिया
पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि दीक्षांत केवल डिग्री वितरण का अवसर नहीं, बल्कि शिक्षक, अभिभावक और संस्थान के सामूहिक समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज पैकेज के पीछे भागने की प्रवृत्ति बढ़ी है, जबकि नम्रता और सद्व्यवहार से ही व्यक्ति महान बनता है। साथ ही विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को शीघ्र भरने की आवश्यकता बताई।
राज्य सरकार उच्च शिक्षा में नीतिगत सुधारों के लिए प्रतिबद्ध : डॉ. बैरवा
प्रदेश के डिप्टी सीएम एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा में संरचनागत विकास, नई नियुक्तियों और नीतिगत सुधारों के लिए प्रतिबद्ध है। राज्यमंत्री प्रो. मंजू बाघमार ने नई शिक्षा नीति को कौशल, नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने वाला बताया।
255 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि
समारोह में इस वर्ष कुल 255 शोधार्थियों को विद्या-वाचस्पति (पीएच.डी.) की उपाधि प्रदान की गई। इसमें 111 छात्र और 144 छात्राएं शामिल हैं। वही कुलाधिपति स्वर्ण पदक 8 छात्राओं को, विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक 90 विद्यार्थियों (15 छात्र और 75 छात्राएं) को और
समारोह में कुलगुरु प्रो. बीपी सारस्वत ने विश्वविद्यालय की वर्षभर की उपलब्धियों की रिपोर्ट पेश की है। संचालन रजिस्ट्रार डॉ. बीसी गर्ग ने किया। कार्यक्रम में विधायक तारा चंद जैन, उदयलाल डांगी और प्रताप भील के साथ ही राज्यपाल के सलाहकार प्रो. कैलाश सोढानी, वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा के कुलगुरु प्रो. बीएल वर्मा मौजूद रहे।
