सीएस के आदेश को धता: सरकारी दफ्तरों में ‘मौखिक चर्चा’ के नाम पर सैकड़ों फाइलें पेंडिंग
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विभाग मुखियाओं की आदत से कामकाज प्रभावित, कर्मचारियों में बढ़ रहा आक्रोश
उदयपुर, 13 फरवरी: प्रदेश के मुख्य सचिव के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद उदयपुर संभाग मुख्यालय के कई सरकारी कार्यालयों में फाइलों और पत्रावलियों को “मौखिक चर्चा” के नाम पर अटकाने का सिलसिला जारी है। इससे न केवल सरकारी कामकाज प्रभावित हो रहा है, बल्कि अधीनस्थ कर्मचारियों में भी भारी नाराजगी देखी जा रही है।
जलदाय विभाग, सार्वजनिक निर्माण विभाग, अजमेर विद्युत वितरण निगम, चिकित्सा विभाग, उदयपुर विकास प्राधिकरण, नगर निगम और जिला परिषद जैसे महकमों में रोजमर्रा के कार्यों से जुड़ी बड़ी संख्या में फाइलें निर्णय के इंतजार में पड़ी हैं। कर्मचारियों का कहना है कि फाइलें नियमित रूप से अंतिम निर्णय के लिए भेजी जाती हैं, लेकिन अधिकारी या तो उन्हें अपने पास रोक लेते हैं या बिना निर्णय के “डिस्कस/स्पीक” लिखकर वापस लौटा देते हैं।
जनता की नाराजगी का शिकार कर्मचारी
कर्मचारियों का कहना है कि समय पर काम नहीं होने पर शिकायतें होती हैं और हमेशा कर्मचारी ही कटघरे में खड़ा किया जाता है। कई बार लोगों द्वारा सेवा शुल्क मांगने जैसे आरोप भी लगाए जाते हैं, जबकि देरी का कारण अधिकारियों द्वारा फाइलें रोकना होता है। मुख्य सचिव सुधांश पंत ने पहले ही आदेश दिए थे कि कोई भी अधिकारी “डिस्कस” या “स्पीक” के नाम पर फाइल नहीं रोकेगा। यदि किसी बिंदु पर स्पष्टीकरण चाहिए तो नोटशीट पर स्पष्ट लिखा जाए। बावजूद इसके आदेशों का पालन नहीं हो रहा।
कर्मचारियों की परेशानी बढ़ी
कर्मचारियों का कहना है कि अधिकारी चाहें तो फोन पर भी तुरंत जानकारी ले सकते हैं, लेकिन उन्हें बार-बार कक्ष में बुलाया जाता है। कई कार्यालय दूर-दराज क्षेत्रों में हैं, जिससे कर्मचारी को अपना काम छोड़कर जाना पड़ता है। कर्मचारियों ने सवाल उठाया कि रास्ते में दुर्घटना होने पर जिम्मेदारी किसकी होगी, जबकि उन्हें वाहन भत्ता तक नहीं मिलता।
