गर्मी की दस्तक के साथ बढ़ता पेयजल संकट
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ग्रामीण इलाकों में हैंडपंप जवाब देने लगे, आमेट में पानी को लेकर महिलाओं में झड़प
उदयपुर, 13 फरवरी: फरवरी माह का आधा हिस्सा गुजरते ही मेवाड़-वागड़ अंचल में गर्मी ने दस्तक दे दी है। तापमान बढ़ने के साथ ही भूजल स्तर तेजी से गिरने लगा है। इसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल उपलब्धता पर पड़ रहा है। हालात यह हैं कि कई गांवों में पानी को लेकर विवाद और झगड़े बढ़ने लगे हैं।
राजसमंद जिले के आमेट क्षेत्र में गुरुवार को पेयजल भरने को लेकर महिलाओं के बीच कहासुनी इतनी बढ़ गई कि एक-दूसरे की मटकियां तक तोड़ दी गईं। स्थानीय लोगों के अनुसार सार्वजनिक जल स्रोतों पर पानी भरने के लिए सुबह से ही भीड़ जुटने लगी है और सीमित पानी के कारण तनाव की स्थिति बन रही है। उदयपुर संभाग के आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में आज भी पेयजल का सबसे बड़ा साधन हैंडपंप हैं। लेकिन भूजल स्तर गिरने के चलते इनमें से बड़ी संख्या में हैंडपंप दम तोड़ने लगे हैं। कई स्थानों पर पानी बेहद कम निकल रहा है या पूरी तरह बंद हो चुका है।
ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के शुरुआती दौर में ही यदि यह स्थिति बन रही है तो अप्रैल-मई में हालात और गंभीर हो सकते हैं। कई गांवों में महिलाओं को दो से तीन किलोमीटर दूर तक पानी लाने जाना पड़ रहा है।
सरकारी स्कूलों में भी पानी की समस्या
पेयजल संकट का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी दिखने लगा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार उदयपुर जिले में 5,847 सरकारी स्कूल है, जिनमें से 2900 से अधिक स्कूलों में पानी की स्थिति चिंताजनक है, जो जिले के कुल स्कूलों का लगभग पचास फीसदी है। शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्र भी इसकी पुष्टि करते हैं कि ज्यादातर प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूलों में पेयजल को लेकर स्थिति खराब है, जहां हैण्डपंप खराब हैं या टंकी की हालत ठीक नहीं। जिसके चलते विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जबकि अभी मौजूदा सत्र पूरा होने में लगभग डेढ़ महीना बाकी है।
समय रहते समाधान जरूरी
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते जल विवाद और स्कूलों में पानी की कमी को देखते हुए प्रशासन के सामने चुनौती है कि गर्मी के चरम पर पहुंचने से पहले जल स्रोतों की मरम्मत, वैकल्पिक व्यवस्था और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। अन्यथा आने वाले महीनों में पेयजल संकट और गंभीर रूप ले सकता है।
