उदयपुर में अब तक नहीं चल पाईं इलेक्ट्रिक बसें
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21 महीने बाद भी अटकी योजना, उदयपुर सहित प्रदेश के सात शहरों के लिए जारी किया था 105 करोड़ रुपए का बजट
उदयपुर, 9 नवम्बर: राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी इलेक्ट्रिक बस योजना अब तक झीलों की नगरी उदयपुर में परवान नहीं चढ़ पाई है। फरवरी 2024 में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सरकार के पहले बजट में उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, बीकानेर, भरतपुर और उदयपुर सहित सात शहरों में कुल 500 इलेक्ट्रिक बसें शुरू करने की घोषणा की थी। इनमें उदयपुर के लिए 35 बसें निर्धारित थीं। लेकिन घोषणा के 21 महीने बीत जाने के बावजूद बसों का संचालन शुरू नहीं हो सका है।
सरकार ने इस परियोजना के लिए 105 करोड़ रुपये का बजट जारी किया था। योजना के तहत इन बसों का संचालन और मेंटेनेंस स्वायत्त शासन विभाग के माध्यम से कन्वर्जेन्स एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (CESL) को सौंपा जाना था। आवश्यक स्वीकृतियां भी मिल चुकी हैं, लेकिन अभी तक बसों की आपूर्ति और रूट निर्धारण की प्रक्रिया अधूरी है। नतीजतन, शहरवासी और पर्यटक दोनों ही इस आधुनिक परिवहन सुविधा से वंचित हैं।
फिलहाल उदयपुर में नगर निगम की कुछ लो-फ्लोर बसें और निजी ऑटो सेवाएं ही सिटी ट्रांसपोर्ट का माध्यम हैं। बढ़ते ट्रैफिक और प्रदूषण के बीच इलेक्ट्रिक बसें राहत का बड़ा साधन साबित हो सकती थीं। खासकर फतेहसागर, सज्जनगढ़, सिटी पैलेस और बड़ी झील जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंचने में यात्रियों को सुविधा मिलती।
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि ई-बस परियोजना में देरी से न केवल जनता को असुविधा हो रही है, बल्कि पर्यावरणीय लाभ और पर्यटन विकास की संभावनाएं भी प्रभावित हो रही हैं। हर साल हजारों देसी-विदेशी सैलानी आने वाले इस शहर में स्वच्छ और व्यवस्थित सार्वजनिक परिवहन की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह योजना जल्द लागू होती है तो यह न केवल उदयपुर बल्कि पूरे प्रदेश में हरित परिवहन की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
नए साल में दौड़ने की उम्मीद
इस मामले में नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना का कहना है कि “राज्य सरकार स्तर पर प्रक्रिया अंतिम चरण में है। बसों की आपूर्ति और चार्जिंग स्टेशन से जुड़ी तकनीकी औपचारिकताएं पूरी होते ही जल्द संचालन शुरू कर दिया जाएगा।” उदयपुर में ई—बस के डिपो का कार्य पूरा होने को है।
