शादी से 6 दिन पहले दूल्हे की मौत: अपनी शादी के कार्ड बांटकर लौट रहा था युवक
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गगनभेदी नारों के बीच सनातन सेवा के सिपाही का हुआ अंतिम संस्कार
मावली, 5 दिसंबर: श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के मावली तहसील अध्यक्ष राहुल सिंह सारंगदेवोत (25) का गुरुवार रात हुए सड़क हादसे में निधन हो गया।
भटेवर से डबोक लौटते समय दरौली के पास फोरलेन हाईवे पर उसकी गाड़ी दुर्घटना का शिकार हो गई। हादसे के तुरंत बाद उसे डबोक अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के लिए उसे उदयपुर लाया जा रहा था कि रास्ते में ही उसकी सांसें थम गईं। इस हादसे में उसका साथी लक्ष्मण सिंह भी गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसके पैरों में फ्रैक्चर बताया जा रहा है।
राहुल की शादी 11 दिसंबर को होनी थी और वह स्वयं रिश्तेदारों को निमंत्रण पत्र देकर घर लौट रहा था। खुशियों से भरे घर में अचानक आई इस मौत की खबर ने परिवार और समाज को स्तब्ध कर दिया। जिस घर में वधू के स्वागत की तैयारी हो रही थी, वहाँ मातम फैल गया।
श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना का पदाधिकारी होने से राहुल की देह जिस एम्बुलेंस से ले जाई गई, उसे भगवा ध्वज और पुष्पमालाओं से सुसज्जित कर गांव लाया गया। मार्ग में जगह-जगह समाजजन, करणी सैनिक, बुजुर्ग और युवा पुष्प अर्पित करते दिखे। गांव पहुंचने पर उसका अंतिम संस्कार सनातन परंपराओं के अनुसार किया गया।
बेकाबू कार डिवाइडर पर चढ़कर रांग साइड में जाकर ट्रेलर से भिड़ी
राहुल सिंह अपनी कार से घर लौट रहे थे, तभी फोरलेन हाईवे पर कार अचानक बेकाबू होकर डिवाइडर पर चढ़ते हुए रॉन्ग साइड चली गई। रॉन्ग साइड जाते ही तेज रफ्तार ट्रेलर ने उनकी कार को टक्कर मार दी। हादसा इतना भयानक था कि कार की बॉडी आगे और पीछे से पूरी तरह पिचक गई। राहुल की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। राहुल तीन भाई-बहनों में दूसरे नंबर के थे। युवक के पिता प्रेम सिंह और माता रूप कुंवर निवासी अचलाना मावली उदयपुर हैं।
अब समाज को अपनाना चाहिए डिजिटल निमंत्रण की परम्परा
करणी सेना से जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह चुंडावत का इस हादसे के बाद बड़ा बयान सामने आया है। जिसमें उन्होंने अपील की है कि विवाह और अन्य कार्यक्रमों में कार्ड बांटने की परंपरा को अब बदले जाने की जरूरत है। समाज को अब डिजिटल निमंत्रण की प्रक्रिया अपनानी होगी। उन्होंने कहा, “वास्तविक परंपरा वही है जो जीवन बचाए।” उन्होंने कहा कि
राहुल सिंह न केवल करणी सेना के सक्रिय कार्यकर्ता थे, बल्कि सनातन धर्म, न्याय और समाजसेवा के एक निर्भीक योद्धा माने जाते थे। उनके जाने से संगठन ने एक मजबूत स्तंभ खो दिया है।
