हेमसागर तालाब प्रकरण: हाईकोर्ट में जनहित याचिका निस्तारित, तालाब क्षेत्र में केवल पिलर निर्माण
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मावली, 18 फरवरी: क्षेत्र के हेमसागर तालाब की भूमि को मूल स्वरूप में दर्ज कराने और उसके संरक्षण की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर राजस्थान उच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। डी.बी. सिविल रिट याचिका संख्या 20061/2025 में मावली निवासी पन्नालाल जीणावत, ललित कुमार, अकील हुसैन और राधाकृष्ण शर्मा ने राज्य सरकार सहित संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध याचिका दायर की थी।
याचिका में खाता संख्या 434, खासरा संख्या 234 (260 बीघा 18 बिस्वा) एवं 235 (11 बीघा 17 बिस्वा) की भूमि, जो मौजा मावली, जिला उदयपुर में स्थित है, को राजस्व अभिलेखों में पुनः “पाल नदी तालाब पेटा” (तालाब) के रूप में दर्ज करने तथा कृषि विभाग के नाम दर्ज नामांतरण को निरस्त करने की मांग की गई थी। साथ ही तालाब भूमि एवं उसके कैचमेंट क्षेत्र के संरक्षण, अतिक्रमण हटाने, सीमांकन और जल भंडारण क्षमता पुनर्जीवित करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाने के निर्देश देने का आग्रह किया गया।
प्रकरण की सुनवाई डॉ. जस्टिस पुष्पेन्द्र सिंह भाटी एवं जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने की। राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने न्यायालय को आश्वस्त किया कि तालाब/झील क्षेत्र में केवल पुल के पिलर बनाए जाएंगे और तालाब के ऊपर कोई वास्तविक निर्माण नहीं किया जाएगा।
न्यायालय ने इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए जनहित याचिका का निस्तारण किया तथा निर्देश दिया कि दिए गए आश्वासन का पूर्णतः पालन सुनिश्चित किया जाए। निर्णय को पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक हित की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
