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कस्टोडियल टॉर्चर और झूठे एनडीपीएस केस पर हाईकोर्ट सख्त

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कस्टोडियल टॉर्चर और झूठे एनडीपीएस केस पर हाईकोर्ट सख्त

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प्रतापगढ़ SHO सस्पेंड, मजिस्ट्रेट की ‘न्यायिक हिम्मत’ की सराहना
प्रतापगढ़, 30 जनवरी:
राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ ने प्रतापगढ़ में पुलिस हिरासत के दौरान बेरहमी से मारपीट और एक व्यक्ति को झूठे एनडीपीएस मामले में फंसाने के गंभीर आरोपों पर सख्ती दिखाई है। हाईकोर्ट की फटकार के बाद प्रतापगढ़ एसपी ने तत्काल प्रभाव से आरोपी पुलिस इंस्पेक्टर एवं तत्कालीन एसएचओ दीपक बंजारा को निलंबित कर दिया है। साथ ही, मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायिक जांच जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
जस्टिस फरजंद अली की अदालत ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए प्रतापगढ़ के न्यायिक मजिस्ट्रेट को बिना किसी दबाव के जांच आगे बढ़ाने का निर्देश दिया। पीड़ित की ओर से सीनियर एडवोकेट धीरेंद्रसिंह और एडवोकेट रॉबिन सिंह ने पैरवी की। कोर्ट ने पीड़ित की चोटों के फोटो देखने के बाद पुलिस के व्यवहार को “जानवरों जैसा” करार दिया था।
क्या है पूरा मामला
यह याचिका शाकिर शेख (34) निवासी बजरंगगढ़, हाल अशोक नगर, प्रतापगढ़ की है। आरोप है कि एसएचओ दीपक बंजारा और उनकी टीम ने शाकिर के पिता अब्दुल हमीद शेख को हिरासत में लेकर जबरन घर में घुसकर बर्बरतापूर्वक प्रताड़ित किया और झूठे एनडीपीएस केस में फंसाने के लिए फर्जी सबूत गढ़े। आरोपों के अनुसार, पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 59 और बीएनएस के तहत गंभीर धाराओं में उलझाने की कोशिश की, जिससे 10 साल से अधिक की सजा का खतरा बन सके। याचिका में इंस्पेक्टर दीपक बंजारा के अलावा प्रतापगढ़ एसपी, उदयपुर आईजी, डीजीपी राजस्थान, सीएमएचओ प्रतापगढ़, कांस्टेबल राजवीर, रमेश उर्फ गजनी, सोनू यादव सहित चार नर्सिंग छात्र भी प्रतिवादी बनाए गए हैं।
सरकार ने मानी गलती
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता ने बताया कि 22 जनवरी को दीपक बंजारा को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू की गई है, जिसकी जिम्मेदारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रतापगढ़ को सौंपी गई है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पूर्व आदेश में ‘गुलाब सिंह’ के स्थान पर सही नाम ‘दीपक बंजारा’ पढ़ा जाए। कोर्ट ने न्यायिक मजिस्ट्रेट की ‘ज्यूडिशियल करेज’ की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने कानून के शासन के प्रति प्रतिबद्धता दिखाई है। अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी। निलंबित इंस्पेक्टर पर एसीबी जयपुर में फर्जी ड्रग्स केस बनाकर 22 लाख रुपये वसूलने के आरोप भी दर्ज हैं। परिवादी के अनुसार, 50 लाख की मांग के बाद 22 लाख की रिश्वत दी गई थी, जिस पर एसीबी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।

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