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कला संकुल के लिए भूमि आवंटित, जहां प्रदर्शित होंगी 5 हजार से अधिक पांडुलिपियां

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कला संकुल के लिए भूमि आवंटित, जहां प्रदर्शित होंगी 5 हजार से अधिक पांडुलिपियां

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जोगी तालाब के समीप 10 हजार वर्ग फीट भूमि का आवंटन, आॅडिटोरियम एवं ओपन थियेटर भी बनेगा
उदयपुर, 30 सितम्बर (सुभाष शर्मा):
मेवाड़ की अमूल्य धरोहरों को संरक्षित करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। जोगी तालाब के समीप अभिलेखागार विभाग को 10 हजार वर्ग फीट जमीन आवंटित की गई है। यहां आधुनिक सुविधाओं से युक्त कला संकुल बनाया जाएगा। इसमें विभाग का कार्यालय, प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान, पांच हजार पांडुलिपियों का भंडार, 100 सीट का ऑडिटोरियम और एक ओपन थियेटर स्थापित करने की योजना है। संरक्षित पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में संरक्षित किया जा रहा है, जो ना केवल पर्यटकों के लिए, बल्कि शोधकर्ताओं के लिए भी उपयोगी साबित होंगी।
अभिलेखागार विभाग के सहायक निदेशक बसंत सिंह सोलंकी ने बताया कि कला संकुल के बन जाने के बाद मेवाड़ के ऐतिहासिक दस्तावेजों को सुरक्षित और आमजन तक पहुंचाने में आसानी होगी। यहां मेवाड़ से जुड़े ताम्रपत्रों को भी डिजीटल रूप में प्रदर्शित किया जाएगा। जहां पर्यटक मेवाड़ के इतिहास, हल्दीघाटी युद्ध, चेतक के बलिदान और महाराणा प्रताप से जुड़ी जानकारी डिजिटल रूप में देख और पढ़ पाएंगे।
ताम्रपत्र बीकानेर संग्रहालय में संरक्षित
सहायक निदेशक बसंत सिंह सोलंकी ने बताया कि मेवाड़ के शूरवीरों और शासकों से जुड़ी अनमोल धरोहर ताम्रपत्र इस समय बीकानेर की शोभा बढ़ा रहे हैं। महाराणा प्रताप, महाराणा सांगा और महाराणा कुंभा सहित कई शासकों से जुड़े लगभग एक हजार ताम्रपत्र स्थानीय अभिलेखागार को सौंपे गए थे, परंतु जगह के अभाव में वर्ष 2019 में इन्हें बीकानेर स्थित राज्य अभिलेखागार संग्रहालय भेज दिया गया। वहां इन धरोहरों को सहेजकर प्रदर्शित किया गया है। तांबे की प्लेट पर उकेरे अभिलेख हजारों साल बाद भी वैसी ही अवस्था में पढ़े जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि ताम्रपत्रों को मूल स्वरूप में लाने की बजाय डिजिटल रूप में वापस लाया जाएगा।

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