‘जनजाति क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधा 2.5 किमी तक लाई जाए’
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सांसद डॉ. मन्ना लाल रावत ने संसद में उठाया मुद्दा, नियमों में शिथिलता का आग्रह
उदयपुर, 18 दिसम्बर: सांसद डॉ. मन्ना लाल रावत ने जनजाति बहुल क्षेत्रों में बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत करने के लिए संसद में प्रभावी ढंग से आवाज उठाई है। उन्होंने नियम 377 के तहत सूचना के माध्यम से मांग की कि वर्तमान में पांच किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग आउटलेट खोलने के नियमों में शिथिलता देते हुए इसे घटाकर ढाई किलोमीटर किया जाए, ताकि दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोगों को सुगम बैंकिंग सुविधाएं मिल सकें।
सांसद डॉ. रावत ने बताया कि उनका लोकसभा क्षेत्र उदयपुर मुख्यतः जनजाति बहुल है, जहां आबादी बिखरी हुई है और पहाड़ी भू-भाग के कारण अनेक गांवों में बैंकिंग सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। उन्होंने कहा कि उदयपुर जिले के कल्याणपुर, बावलवाड़ा, कनबई, सलूम्बर जिले के जावद, चावण्ड, परसाद, गींगला, सल्लाड़ा, झल्लारा, खरका तथा प्रतापगढ़ जिले के मूंगाणा (धरियावद) सहित कई बड़े गांवों में लंबे समय से राष्ट्रीयकृत बैंक शाखाएं खोलने की मांग की जा रही है।
दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां बनीं बाधा
सांसद ने कहा कि केंद्र सरकार जनजाति क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान सहित कई योजनाएं चला रही है। पीएमजीएसवाई जैसी योजनाओं में भी जनजाति क्षेत्रों के लिए विशेष छूट दी गई है, जिससे बुनियादी सुविधाओं का विस्तार संभव हुआ है। इसी तर्ज पर बैंकिंग सेवाओं के मानकों में भी व्यावहारिक छूट जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में प्रत्येक गांव के पांच किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग आउटलेट उपलब्ध कराने का लक्ष्य है, लेकिन पहाड़ी रास्तों, सीमित परिवहन और बिखरी बसावट वाले जनजाति क्षेत्रों में यह दूरी अधिक है। ऐसे में इसे घटाकर 2.5 किलोमीटर किया जाना आवश्यक है।
वित्तीय समावेशन को मिलेगा बल
डॉ. रावत ने आग्रह किया कि यदि नियमों में यह छूट दी जाती है तो जनजाति क्षेत्रों के किसान, व्यापारी और आमजन को समान व सुलभ बैंकिंग सुविधाएं मिलेंगी, जिससे वित्तीय समावेशन को मजबूती मिलेगी और सरकारी योजनाओं का लाभ भी सीधे लोगों तक पहुंच सकेगा।
