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फार्मेसी मॉड्यूल में बड़ी लापरवाही आई सामने

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फार्मेसी मॉड्यूल में बड़ी लापरवाही आई सामने

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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने जताया असंतोष, फार्मेसी मॉड्यूल पर 95 फीसदी से अधिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की रुचि नहीं
सुभाष शर्मा
उदयपुर, 15 जनवरी:
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), राजस्थान द्वारा डिजिटल स्वास्थ्य पहलों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों की अनुपस्थिति और कार्य में शिथिलता को गंभीरता से लेते हुए कड़ा रुख अपनाया गया है। गत 12 जनवरी को आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस में कई जिलों की भागीदारी असंतोषजनक पाए जाने पर इसे डिजिटल स्वास्थ्य योजनाओं के प्रति गंभीरता की कमी माना गया है।
एनएचएम में ओएसडी संतोष कुमार गोयल द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में आयोजित होने वाली सभी वीडियो कॉन्फ्रेंस में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) सहित पूरी जिला टीम—जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी), जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम), सांख्यिकी अधिकारी, फार्मासिस्ट और कंप्यूटर ऑपरेटर—की व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य होगी। निर्देशों की अवहेलना या कार्य में लापरवाही बरतने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
समीक्षा बैठक के मुख्य एजेंडे में IHMS फार्मेसी मॉड्यूल, DHIS पंजीकरण, ABHA सैचुरेशन तथा राजहेल्थ पोर्टल पर HPR/HFR सीडिंग जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे। 12–13 जनवरी 2026 तक की स्थिति के अनुसार डिजिटल स्वास्थ्य पहलों में जिलों का प्रदर्शन असमान पाया गया।
प्रदेश के 107 पीएचसी ही हो पाई लाइव
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के ओएसडी संतोष कुमार गोयल बताते हैं कि राज्य के कुल 2,836 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में से अब तक केवल 107 ही फार्मेसी मॉड्यूल पर ‘लाइव’ हो पाए हैं। सीकर और झुंझुनू जैसे जिलों में बड़ी संख्या में PHC अब भी लंबित हैं। वहीं, राजहेल्थ पोर्टल पर राज्य के 20,426 स्वास्थ्य केंद्रों में से 3,896 केंद्रों पर अब तक HF-ID उपलब्ध नहीं हो सका है, जिसमें सीकर, भीलवाड़ा और दौसा शीर्ष पर हैं।
प्रदेश के वे जिले जिनकी एक भी पीएचसी लाइव मॉड्यूल में नहीं जुड़ी
फार्मेसी मॉड्यूल में लाइव नहीं जुड़ने वाले जिलों में जयपुर सैकण्ड, भीलवाड़ा, बाड़मेर, डीडवाडा—कुचामन, जालौर, नागौर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, हनुमानगढ़, कोटा, कोटपुतली—बहरोड, भरतपुर, करौली, बारां, सवाई माधोपुर, धौलपुर, ब्यावर, बूंदी, डीग, प्रतापगढ़ और सलूम्बर शामिल हैं। जबकि सीकर, चूरू, उदयपुर, अलवर, पाली, टोंक, चित्तौड़गढ़, बालोतरा, खैरतल—तिजारा जिलों की महज एक—एक पीएचसी ही इसमें जुड़ पाईं।

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