अहमदाबाद अस्पताल में मां एडमिट, उदयपुर में अटका बेटा
Share
बसों की हड़ताल से आमजन परेशान, टिकट रद्द कर लौटाए पैसे
उदयपुर, 24 फरवरी: प्रदेशभर में प्राइवेट बसों और टैक्सियों की हड़ताल का असर उदयपुर में भी गहराता जा रहा है। बसों के पहिए थमने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे मार्मिक मामला मावली निवासी शकील का सामने आया है, जिसकी मां अहमदाबाद के एक अस्पताल में भर्ती है, लेकिन हड़ताल के कारण वह उदयपुर में ही फंसा रह गया।
शकील ने बताया कि उसकी अहमदाबाद जाने की बस में सीट बुक थी। वह गांव से सुबह-सुबह उदयपुर पहुंचा, लेकिन बस संचालक ने हड़ताल का हवाला देते हुए टिकट के पैसे लौटा दिए। “सुबह 6 बजे से बस स्टैंड पर खड़ा हूं, मां अस्पताल में भर्ती है, लेकिन जाने का कोई साधन नहीं मिल रहा,” उसने बताया।
रोडवेज और ट्रेन का सहारा
प्राइवेट बसों के बंद रहने से यात्री अब रोडवेज बसों और ट्रेनों का सहारा ले रहे हैं। हालांकि सीमित सीटों के कारण वहां भी भीड़ बढ़ गई है। इधर, उदयपुर-अहमदाबाद नेशनल हाईवे पर कुछ बसों के संचालन की सूचना मिलने पर ट्रैवल एसोसिएशन के पदाधिकारी मौके पर पहुंचे और बसें खाली करवाईं।
उदयापोल पर धरना
हड़ताल के समर्थन में ट्रैवल एसोसिएशन के पदाधिकारी उदयापोल स्थित तोप के सामने धरने पर बैठे रहे। दिनभर प्रदर्शन के बाद वे रात को भी वहीं रुके। एसोसिएशन के अध्यक्ष पारस सिंघवी ने आरोप लगाया कि निजी बस संचालकों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग द्वारा पंजीकृत बसों के परमिट निरस्त करने और भारी-भरकम चालान काटने की कार्रवाई की जा रही है, जो गलत है।
टैक्स को लेकर नाराजगी
एसोसिएशन के डॉ. अब्दुल सलाम खान ने कहा कि राजस्थान में बसों पर 40 हजार रुपए टैक्स लिया जा रहा है, जबकि उत्तरप्रदेश में 7 हजार, मध्यप्रदेश और गोवा में 3500 तथा अरुणाचल और नागालैंड में 1000 रुपए टैक्स है। उन्होंने सरकार से टैक्स में राहत देने की मांग की। उदयपुर टूरिस्ट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष ऋषभ जैन ने भी कहा कि बस मालिकों की जायज मांगों को पूरा किया जाना चाहिए। फिलहाल हड़ताल जारी रहने से आमजन को खासी परेशानी उठानी पड़ रही है।
