नवलखा महल अब स्वतंत्रता के बलिदानियों का प्रेरणा केंद्र : महाशय गुलाटी
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जहां सत्यार्थ प्रकाश लिखी गई, वहां राष्ट्र मंदिर का लोकार्पण
उदयपुर, 22 फरवरी : “नवलखा महल अब केवल ऐतिहासिक धरोहर नहीं, बल्कि स्वतंत्रता के लिए प्राण न्यौछावर करने वाले बलिदानियों का जीवंत प्रेरणा केंद्र बन चुका है। यह राष्ट्र चेतना और संस्कारों का तीर्थस्थल है।”
यह उद्गार एम.डी.एच. ग्रुप के चेयरमैन महाशय राजीव गुलाटी ने रविवार को यहां गुलाब बाग स्थित नवलखा महल में राष्ट्र मंदिर के लोकार्पण अवसर पर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानन्द सरस्वती की कर्मभूमि रहे इस पावन स्थल को राष्ट्र उन्नायक वीथिका एवं संग्रहालय के माध्यम से स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियों से जोड़ा गया है। उनका उद्देश्य नई पीढ़ी को देशभक्ति, त्याग और समर्पण के मूल्यों से जोड़ना है, ताकि वे अपने इतिहास को जानें और उससे प्रेरणा लें।
महाशय गुलाटी ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय महाशय धर्मपाल गुलाटी द्वारा आरंभ किए गए सेवा और राष्ट्रनिर्माण के कार्यों की निरंतरता में राष्ट्र मंदिर की परिकल्पना साकार हुई है। उन्होंने कहा कि यह स्थान केवल श्रद्धा का केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्रप्रेम की भावना को जागृत करने का माध्यम बनेगा।
समारोह में उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन ने कहा कि नवलखा महल को राज्य की पर्यटन सूची में शामिल करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे यह स्थल देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने। न्यायमूर्ति सज्जन सिंह कोठारी ने महाशय राजीव गुलाटी के सामाजिक एवं सांस्कृतिक योगदान की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक पहल बताया।
श्रीमद् दयानन्द सत्यार्थ प्रकाश न्यास के अध्यक्ष अशोक आर्य ने बताया कि जब नवलखा महल आर्य समाज को प्राप्त हुआ तो पूर्ण रूप से जीर्ण-शीर्ण था। सर्वप्रथम दान की आहुति न्यास के संस्थापक अध्यक्ष स्वामी तत्त्वबोध सरस्वती ने एक करोड़ रुपए देकर की। इसके पश्चात् सत्यनारायण लाहोटी, अमेरिका के प्रसिद्ध कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. सुखदेव चन्द सोनी, हरि वार्ष्णेय, सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष स्मृति शेष सुरेश चन्द्र आर्य, दीनदयाल गुप्त, बाबू मिठाई लाल सिंह, स्मृतिशेष महाशय धर्मपाल, राजस्थान के पूर्व लोकायुक्त जस्टिस सज्जन सिंह कोठारी, सेठ लालचन्द मित्तल, एस.के. आर्य जैसे दानवीरों ने न्यास में कई प्रकल्प स्थापित किए।
न्यास के मंत्री भवानीदास आर्य ने बताया कि न्यास के न्यासी मंडल की बैठक भी हुई। संरक्षक राजीव गुलाटी की अध्यक्षता में हुई बैठक में आगामी रूपरेखा तैयार की गई। इससे पूर्व, महाशय धर्मपाल गुलाटी के उदयपुर आगमन पर उनकी अगवानी में प्रतापनगर से सेवाश्रम, सूरजपोल होते हुए गुलाब बाग तक 50 मोटरसाइकिल सवारों की रैली दिव्येश सुथार के संयोजन में निकाली गई। कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ, ध्वजारोहण एवं भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया।
