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महिला दिवस पर पिछोला में श्रमदान, झील संरक्षण पर हुआ संवाद

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महिला दिवस पर पिछोला में श्रमदान, झील संरक्षण पर हुआ संवाद

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उदयपुर, 8 मार्च: महिला दिवस के अवसर पर रविवार को पिछोला स्थित मांजी मंदिर परिसर में श्रमदान और संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि उदयपुर की झीलें, जल स्रोत और पूरा पर्यावरण एक मां की तरह हमारा पोषण करते हैं, इसलिए इनके संरक्षण की जिम्मेदारी सभी की है।
झील विशेषज्ञ डॉ. अनिल मेहता ने कहा कि उदयपुर सदियों से बावड़ियों, सरोवरों और तालाबों के निर्माण में अग्रणी रहा है। उन्होंने कहा कि प्रकृति सेवा और स्वच्छता ही मातृत्व से भरी स्त्री ऊर्जा का सम्मान है। यदि इस भावना को मजबूत किया जाए तो जलस्रोत फिर से अपने मूल स्वरूप में लौट सकते हैं।
झील प्रेमी तेज शंकर पालीवाल ने कहा कि झीलों के किनारों पर गंदगी का विसर्जन अब तक नहीं रुक पाया है। अनियंत्रित पर्यटन के कारण बढ़ता कचरा झीलों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता नंदकिशोर शर्मा ने कहा कि ऐतिहासिक मांजी मंदिर परिसर एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक स्थल है, जिसे पर्यावरण अनुकूल बनाए रखना जरूरी है। शिक्षाविद कुशल रावल ने कहा कि झीलों के किनारों पर स्थित घाटों, मंदिरों और आध्यात्मिक स्थलों की सुरक्षा से झीलों का पर्यावरण भी बेहतर होगा। कार्यक्रम में वरिष्ठ नागरिक द्रुपद सिंह सहित कई स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।

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