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पाकिस्तान में गाजा पीस डील के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक: TLP का दावा – पुलिस फायरिंग में 250 मौतें, 1500 घायल

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पाकिस्तान में गाजा पीस डील के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक: TLP का दावा – पुलिस फायरिंग में 250 मौतें, 1500 घायल

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TLP प्रमुख साद रिजवी को लगीं गोलियां, हालत नाजुक; सरकार की चुप्पी बरकरार
इस्लामाबाद, 13 अक्टूबर:
पाकिस्तान में गाजा पीस प्लान के विरोध में शुरू हुआ प्रदर्शन अब जानलेवा मोड़ ले चुका है। कट्टरपंथी राजनीतिक संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) ने दावा किया है कि पुलिस की फायरिंग में उनके 250 से ज्यादा कार्यकर्ता और नेता मारे जा चुके हैं, जबकि 1,500 से अधिक घायल हैं। हालांकि अभी तक सरकार या किसी स्वतंत्र स्रोत से इस दावे की पुष्टि नहीं हुई है।
गाजा पीस प्लान के खिलाफ 5 दिन से प्रदर्शन
TLP का यह विरोध प्रदर्शन 9 अक्टूबर से शुरू हुआ था। पार्टी का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के गाजा शांति प्रस्ताव का अप्रत्यक्ष समर्थन किया है, जिससे मुस्लिम जगत की भावनाएं आहत हुई हैं। इसी के विरोध में TLP कार्यकर्ताओं ने लाहौर से इस्लामाबाद तक ‘लॉन्ग मार्च’ शुरू किया।
TLP चीफ साद हुसैन रिजवी को लगी गोलियां
पार्टी प्रवक्ता के अनुसार, मार्च के दौरान हुए टकराव में TLP प्रमुख साद हुसैन रिजवी को भी तीन गोलियां लगी हैं। उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है और उन्हें पास के एक मेडिकल सेंटर में भर्ती कराया गया है।
प्रवक्ता ने कहा, “सरकार इस पूरे आंदोलन को कुचलना चाहती है, इसलिए निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने सीधे फायरिंग की। पूरे पंजाब में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।”
सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं
अब तक पाकिस्तान सरकार या किसी जिम्मेदार अधिकारी की ओर से इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। न ही किसी स्वतंत्र एजेंसी ने TLP के मौत और घायलों के दावों की पुष्टि की है।
हालांकि सोशल मीडिया पर TLP समर्थकों द्वारा कई तस्वीरें और वीडियो शेयर किए जा रहे हैं, जिनमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें देखी जा सकती हैं।
स्थिति बेहद संवेदनशील, सुरक्षा बल हाई अलर्ट प
पंजाब प्रांत के कई हिस्सों में तनाव बना हुआ है और कानून व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। इस्लामाबाद, लाहौर, फैसलाबाद और रावलपिंडी जैसे शहरों में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है।
आगामी दिनों में TLP के आंदोलन के और उग्र होने की आशंका जताई जा रही है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी इस पर चिंता जताई है।

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