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160 करोड़ की ऑनलाइन ठगी का पर्दाफाश, शेरवानी–साफा पहनकर शादी में पहुंचे पुलिसकर्मी

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160 करोड़ की ऑनलाइन ठगी का पर्दाफाश, शेरवानी–साफा पहनकर शादी में पहुंचे पुलिसकर्मी

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डूंगरपुर साइबर सेल की फिल्मी कार्रवाई, गुजरात से शातिर ठग दबोचा
डूंगरपुर, 19 दिसम्बर
: डूंगरपुर पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी और चौंकाने वाली कार्रवाई करते हुए देशभर में 160 करोड़ रुपए की ऑनलाइन ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस रैकेट के मुख्य सहयोगी कौशल कुम्हार को गुजरात के दाहोद जिले में एक शादी समारोह से उस समय गिरफ्तार किया, जब वह दोस्त की शादी में शामिल होने पहुंचा था। खास बात यह रही कि आरोपी को पकड़ने के लिए पांच पुलिसकर्मी शेरवानी पहनकर और सिर पर साफा बांधकर बारात में शामिल हुए और मौके पर उसे दबोच लिया।
शादी के मंडप से दबोचा शातिर ठग
एसपी मनीष कुमार ने बताया कि साइबर ठगी के मामलों की जांच के दौरान सूचना मिली थी कि आरोपी कौशल कुम्हार गुजरात के दाहोद के लिमड़ी क्षेत्र में एक शादी समारोह में पहुंचने वाला है। इस पर डूंगरपुर साइबर सेल की विशेष टीम गठित की गई। टीम के पांचों पुलिसकर्मी पूरी तरह शादी के मेहमानों की तरह सजे-धजे बारात में पहुंचे और सही मौका देखकर कौशल कुम्हार को हिरासत में ले लिया। पुलिस को देखकर आरोपी और बारातियों के होश उड़ गए।
शादी के बाद विदेश भागने की थी तैयारी
पूछताछ में सामने आया कि कौशल कुम्हार शादी समारोह के बाद विदेश भागने की फिराक में था। उससे मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने उसके साथी इलेश पटेल उर्फ निलेश कलाल निवासी सागवाड़ा को भी उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने मिलकर देशभर में लोगों को झांसे में लेकर 450 से अधिक फर्जी बैंक खाते खुलवाए।
दुबई और जॉर्जिया से ऑपरेट हो रहा था रैकेट
पुलिस के अनुसार ये फर्जी खाते दुबई में बैठे शातिर ठग घनश्याम कलाल, वरुण कलाल और उपेंद्र कलाल को उपलब्ध कराए गए थे। इसके अलावा एक आरोपी डैनी उर्फ डैनी नटवरलाल जॉर्जिया में बैठकर ठगी को अंजाम दे रहा था। इन चारों ने मिलकर शेयर मार्केट, ट्रेडिंग, क्रिप्टो करेंसी और ऑनलाइन सट्टा ऐप्स के जरिए देशभर में करीब 160 करोड़ रुपए की ठगी की।
बैंककर्मी होने का उठाया फायदा
एसपी ने बताया कि कौशल कुम्हार डूंगरपुर के एक निजी बैंक में कार्यरत था। उसने इस पद का दुरुपयोग करते हुए कॉलेजों, सार्वजनिक स्थलों और सड़क किनारे केनोपी लगाकर लोगों से दस्तावेज लेकर खाते खुलवाए। गरीब, मजदूर और छात्र-छात्राओं को सरकारी योजनाओं, पैन कार्ड और छात्रवृत्ति का लालच देकर उनके नाम से इंडसइंड, एचडीएफसी, एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा सहित कई बैंकों में खाते खुलवाए गए। बाद में चेकबुक और एटीएम भी आरोपियों ने अपने पास रख लिए।
दो मामलों की जांच में हुआ बड़ा खुलासा
बथड़ी निवासी लालशंकर रोत और सागवाड़ा निवासी अशोक डांगी की शिकायतों की जांच में यह पूरा नेटवर्क उजागर हुआ। खातों में करोड़ों रुपए का संदिग्ध लेन-देन सामने आया। पुलिस अब विदेशों में बैठे आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस मुख्यालय और अन्य एजेंसियों से समन्वय कर रही है।

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