सिटी पैलेस में मेवाड़ राजवंश एवं साहित्य पर संगोष्ठी आयोजित
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साहित्य संरक्षण में मेवाड़ शासकों की भूमिका
उदयपुर, 17 फरवरी: राजस्थान साहित्य अकादमी एवं महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउण्डेशन सिटी पैलेस उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को सिटी पैलेस के कॉन्फ्रेंस हॉल में मेवाड़ राजवंश एवं साहित्य विषय पर संगोष्ठी आयोजित हुई।
संगोष्ठी का मुख्य केन्द्र मेवाड़ राजवंश की वह परम्परा रही, जिसने साहित्य के संरक्षण और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अकादमी सचिव डॉ. बसन्त सिंह सोलंकी ने कहा कि मेवाड़ वीरभूमि के साथ साहित्यिक योगदान के लिए भी जाना जाना चाहिए।
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विद्या पालीवाल ने मेवाड़ की ऐतिहासिक व सांस्कृतिक महत्ता पर प्रकाश डाला। प्रो. माधव हाड़ा ने भारतीय साहित्य को अपनी बौद्धिक परम्परा के आधार पर समझने की आवश्यकता बताई।
मराठा काल में भी जारी रही साहित्य परम्परा
इतिहासकार डॉ. जे.के. ओझा ने कहा कि राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद मेवाड़ में साहित्य सृजन की समृद्ध परम्परा बनी रही। डॉ. राजेंद्रनाथ पुरोहित ने महाराणाओं के निजी पुस्तकालय की पाण्डुलिपियों के योगदान को महत्वपूर्ण बताया। संगोष्ठी में डॉ. मनीष श्रीमाली ने मेवाड़ गजट व हिन्दी पत्रकारिता पर विचार रखे। संचालन डॉ. सरस्वती जोशी ने किया तथा धन्यवाद डॉ. स्वाति जैन ने ज्ञापित किया।
