शीतल बनीं साध्वी आगम प्रभा, जैन दीक्षा महोत्सव संपन्न
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सायरा क्षेत्र के कमोल गांव में निकला भव्य वरघोड़ा, 7000 किमी पदयात्रा के बाद लिया वैराग्य मार्ग
उदयपुर, 22 फरवरी: सायरा क्षेत्र के कमोल गांव में आयोजित पांच दिवसीय जैन भगवती दीक्षा महोत्सव के तहत मुमुक्षु शीतल चंदन सोलंकी ने जैन दीक्षा ग्रहण कर सांसारिक जीवन का त्याग कर दिया। दीक्षा के बाद उन्हें नया नाम ‘साध्वी आगम प्रभा’ प्रदान किया गया। गांव में इस अवसर पर भव्य वरघोड़ा निकाला गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भावभीनी विदाई दी।
मुमुक्षु शीतल पिछले 11 वर्षों से साध्वीवृंद के सान्निध्य में वैराग्य जीवन का अभ्यास कर रही थीं। जैन दर्शन में एम.ए. उत्तीर्ण शीतल ने अपने वैराग्य काल में लगभग 7000 किलोमीटर की पदयात्रा की। उन्होंने एकासन, अठाई तप और तेले तप सहित कई कठोर तप साधनाएं भी कीं।
दीक्षा से पूर्व सुबह उनके घर से मंगल पाठ के बीच विदाई हुई। उन्होंने अंतिम बार गोचरी का लाभ लेकर संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया। वरघोड़ा गांव के प्रमुख मार्गों से होता हुआ दीक्षा स्थल पहुंचा, जहां बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं मौजूद रहीं।

रजोहरण संस्कार के साथ दीक्षा पूर्ण
दीक्षा स्थल पर उपाध्याय डॉ. गौतम मुनि ने रजोहरण संस्कार संपन्न कराया। वे दक्षिण चंद्रिका महासाध्वी डॉ. संयमलता की शिष्या बनीं। कार्यक्रम में जिनेंद्र मुनि, रमेश मुनि और अन्य संतों ने सत्य, अहिंसा और संयम के महत्व पर प्रवचन दिए। मुंबई, सूरत, अहमदाबाद, चित्तौड़गढ़ और पाली सहित विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।
