नाबालिग से दरिंदगी के दोषी को 20 वर्ष की कड़ी कैद
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1.55 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया, पीड़िता को देनी होगी 5 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति
उदयपुर, 4 फरवरी: राजस्थान की न्याय प्रणाली ने नाबालिगों के विरुद्ध होने वाले जघन्य अपराधों पर कड़ा रुख अपनाते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। उदयपुर के विशेष न्यायालय (POCSO एक्ट) के पीठासीन अधिकारी अरुण जैन ने 12वीं की छात्रा के साथ हुए अपहरण और दुष्कर्म के मामले में आरोपी हाजाराम को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 1.55 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
विशिष्ट लोक अभियोजक पूनमचंद मीणा ने बताया कि घटना 20 नवंबर 2024 की है, जब ऋषभदेव क्षेत्र की एक छात्रा स्कूल से घर नहीं लौटी। पुलिस अनुसंधान में सामने आया कि आरोपी हाजाराम ने पीड़िता को मोटरसाइकिल पर बहला-फुसलाकर अगवा किया और तीन दिनों तक बंधक बनाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपी हाजाराम उसके विरुद्ध विरचित आरोप अंतर्गत धारा 137(2), धारा 87, धारा 64(2)(एम), धारा 127 (3) भारतीय न्याय संहिता एवं धारा 5 सहपठित धारा 6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के अपराध के आरोपों में दोषसिद्ध होने योग्य पाया जाता है। आरोपी हाजाराम को धारा 137(2) व धारा 87 भारतीय न्याय संहिता में 5-5 वर्ष कठोर कारावास, 25-25 हजार रुपए जुर्माना, 127 (3) भारतीय न्याय संहिता में 3 वर्ष कठोर कारावास व 5 हजार रुपए जुर्माना, धारा 5 सहपठित धारा 6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 में 20 वर्ष कठिन कारावास व एक लाख रुपए जुर्माने से दंडित किया। न्यायाधीश ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि पीड़िता के साथ किया गया कृत्य गंभीर श्रेणी का है, जिसके लिए दोषी किसी भी रियायत का पात्र नहीं है। अदालत ने कहा, पीड़िता को प्रतिकर राशि पांच लाख रुपए बतौर क्षतिपूर्ति दिलवाया जाना वंचित एवं न्यायसंगत प्रतीत होता है।
इधर, युवती का अपहरण कर दुष्कर्म के दोषी को 3 वर्ष कठोर कारावास, 10 हजार जुर्माना
लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 एवं बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005 संख्या 2 के पीठासीन अधिकारी संजय कुमार भटनागर ने युवती का अपहरण कर उससे दुष्कर्म करने के मामले में आरोपी को तीन वर्ष कठोर कारावास व दस हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया।
विशिष्ट लोक अभियोजक महेंद्र ओझा ने बताया कि पीड़िता ने 3 जून 2025 को बावलवाड़ा थाने में दी रिपोर्ट में सुभाष पुत्र मगनलाल निवासी सरवण पानरवा के विरुद्ध 2 जून 2025 को अपने साथी के साथ मिलकर सागवाड़ा से डरा धमका कर मोटरसाइकल पर अपहरण कर लक्ष्मण के घर ले जाने व कमरा बंद कर उससे दुष्कर्म करने का आरोप लगाया। चिल्लाने पर आवाज सुन प्रकाश, राजेंद्र व कालू के आने पर आरोपी मोटरसाइकिल मौके पर छोड़ भाग गए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद पीठासीन अधिकारी संजय कुमार भटनागर ने सह आरोपी लक्ष्मण को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया जबकि आरोपी सुभाष पुत्र मगनलाल को अपराध धारा 137(2) भारतीय न्याय संहिता में 3 वर्ष कठोर कारावास व 10 हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया। साथ ही पीड़ित पक्ष को 50 हजार रुपए प्रतिकर दिलाया जाना उचित माते हुए केंद्र, राज्य सरकार द्वारा स्थापित निधि या स्कीम से नियमानुसार देने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उदयपुर को पृथक से तहरीर जारी करने के निर्देश दिए।
