चयन बोर्ड का बड़ा फैसला, वास्तविक दिव्यांग अभ्यर्थियों को मिलेगा न्याय
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उदयपुर, 2 फरवरी: राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित भर्तियों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्रों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया है। अब चयन से पूर्व राज्य स्तरीय मेडिकल बोर्ड के माध्यम से दिव्यांगता प्रमाण पत्रों की अनिवार्य जांच की जाएगी।
चयन बोर्ड अध्यक्ष आलोक राज ने इस प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए स्पष्ट किया कि संदिग्ध मामलों की गहन जांच कर केवल पात्र अभ्यर्थियों को ही दिव्यांग कोटे का लाभ दिया जाएगा।
इसी क्रम में समिधा संस्थान, उदयपुर अध्यक्ष डॉ. चंद्रगुप्त सिंह चौहान ने बताया कि समिधा दृष्टि दिव्यांग मिशन के प्रतिनिधिमंडल ने बोर्ड अध्यक्ष से मुलाकात कर फर्जी प्रमाण पत्रों से हो रहे अन्याय को उजागर किया।
बैठक में यह भी तय हुआ कि अन्य राज्यों से आने वाले दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी में रखा जाएगा तथा लंबे समय से रिक्त बैकलॉग पदों को प्राथमिकता से भरा जाएगा। प्रतिनिधिमंडल ने इस निर्णय को वास्तविक दिव्यांगों के लिए आशा की नई किरण बताया।
