बेटे को नहीं बताया मां-बाप अब नहीं रहे, इंजेक्शन लगाकर सुलाया
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पढ़ाई के कारण घर रुकी बेटी की बची जान, पिता बोले– सब उजड़ गया; पूरे इलाके में शोक
चित्तौड़गढ़, 16 जनवरी: चित्तौड़गढ़ शहर के मधुबन इलाके में एक हंसता-खेलता परिवार पल भर में उजड़ गया। भीषण सड़क हादसे में माता-पिता को खोने वाला 6 साल का मासूम बेटा सदमे में है, जिसे सच्चाई बताए बिना इंजेक्शन लगाकर सुलाना पड़ा। घर पर पढ़ाई के कारण रुकी 15 साल की बेटी की जान बच गई, लेकिन वह बरामदे में सुन्न बैठी है। बुजुर्ग माता-पिता अपने इकलौते बेटे और बहू को खोने के बाद संभल नहीं पा रहे।
चित्तौड़गढ़-उदयपुर नेशनल हाईवे पर हुए दर्दनाक हादसे ने नानवानी परिवार की खुशियां छीन लीं। हादसे में रिंकेश नानवानी (40), उनकी पत्नी सुहानी (38), चाची रजनी (58) और फूफा हीरानंद लालवानी (60) की मौत हो गई। केवल 6 साल का बेटा वैभव बचा, लेकिन वह गहरे सदमे में है।
रिंकेश की 15 वर्षीय बेटी निष्ठा ने बताया कि मकर संक्रांति की सुबह मम्मी-पापा उदयपुर गए थे। 10वीं बोर्ड परीक्षा नजदीक होने के कारण वह घर पर ही रुक गई। रात करीब 11:30 बजे मां का आखिरी फोन आया था। इसके कुछ घंटे बाद हादसे की सूचना मिली।
हादसे से मासूम सदमे में
डॉक्टरों के अनुसार हादसे के बाद वैभव न कुछ खा पा रहा था, न सो पा रहा था। लगातार रोने के कारण उसे शांत रखने के लिए इंजेक्शन देकर सुलाया गया। फिलहाल उसे यही बताया गया है कि उसके मम्मी-पापा अस्पताल में हैं। सच्चाई बताने की हिम्मत किसी में नहीं है।
घर में पसरा मातम
मधुबन स्थित घर में सन्नाटा पसरा है। मां सुनीता बेसुध हैं, जबकि बेटी निष्ठा आंखों में आंसू लिए बरामदे में बैठी है। पिता राजकुमार नानवानी ने कहा— “मेरा इकलौता बेटा था… सब उजड़ गया, मेरा परिवार खत्म हो गया।”
कैंसर पीड़ित चाचा पर टूटा दुखों का पहाड़ : हादसे में जान गंवाने वाली रजनी के पति मनोज नानवानी, जो मुंह के कैंसर से पीड़ित हैं, गहरे सदमे में हैं। रजनी ही उनकी देखभाल करती थीं।
एयरबैग नहीं खुला: रिंकेश अपनी चाची की पुरानी कार से यात्रा कर रहे थे, जिसमें एयरबैग नहीं खुला। माना जा रहा है कि एयरबैग खुलता तो जान बच सकती थी। रिंकेश के व्यवहार और सामाजिक जुड़ाव को देखते हुए इलाके के व्यापारियों ने दुकानें बंद रखीं। चार जिंदगियों के एक झटके में चले जाने से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।
