पुलिस-वनकर्मियों की क्रूरता के निशान पीड़ित आदिवासी महिलाओं ने संभागीय आयुक्त को बताए
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वृंदा करात के नेतृत्व में मासूम बच्चों संग पहुंचा प्रतिनिधिमंडल, दोषियों पर कार्रवाई की मांग
उदयपुर, 16 फरवरी: झाड़ोल तहसील के अंबासा गांव के कोदर फला में 12 फरवरी को हुए कथित पुलिस व वनकर्मियों के हमले की शिकार आदिवासी महिलाएं सोमवार को अपने मासूम बच्चों को गोद में लेकर संभागीय आयुक्त प्रज्ञा केवलरवानी से मिलीं। पूर्व सांसद वृंदा करात के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने दोषी पुलिसकर्मियों व वन विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा पीड़ित परिवारों को बेदखल नहीं करने की मांग की।
वन भूमि पर कब्जे के नाम पर 12 लाख लेने का आरोप
आदिवासी जन अधिकार मंच के बाबूलाल वडेरा ने बताया कि 25-30 आदिवासी परिवार कोटड़ा क्षेत्र के जुड़ा गांव के निवासी हैं, जिनकी जमीन बांध की सीमा में आने से खेती पर रोक लगा दी गई। इसके बाद उनका संपर्क अंबासा के फॉरेस्टर प्रभुलाल मीणा से हुआ, जिसने कथित तौर पर 12 लाख रुपए लेकर आश्वासन दिया कि उन्हें वन भूमि पर परेशान नहीं किया जाएगा और पट्टे भी दिलाए जाएंगे।
पीड़ितों का आरोप है कि उन्होंने गाय-भैंस, बकरियां व जेवर बेचकर राशि जुटाई और प्रभुलाल मीणा व रेंजर राजेश मीणा को दी, लेकिन स्थानांतरण के बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
आदिवासियों पर दमन और भ्रष्टाचार के आरोप
माकपा जिला सचिव राजेश सिंघवी ने कहा कि वन विभाग एक ओर आदिवासियों से पैसे लेकर पट्टे का भरोसा देता है, दूसरी ओर हजारों आवेदन लंबित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस, वनकर्मी और कुछ राजनीतिक नेताओं का गिरोह आदिवासियों का शोषण कर रहा है।प्रतिनिधिमंडल में हाकरचंद खराड़ी, होलियाराम, हीरालाल सालवी सहित कई कार्यकर्ता शामिल रहे।
