पेराफेरी में 500 करोड़ की सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप
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चंदनसिंह ग्रुप व राजनीतिक लोग शामिल
उदयपुर, 22 दिसंबर: पेराफेरी पंचायत संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष मदन पंडित ने आरोप लगाया कि पेराफेरी में 500 करोड़ रुपए मूल्य की सरकारी जमीन पर चंदन सिंह देवड़ा ग्रुप ने कब्जा करवा रखा है। पंडित ने कहा कि चंदन सिंह केवल मोहरा है, इसके पीछे भाजपा और कांग्रेस के नेता भी जुड़े हैं।
कब्जाधारियों में राजनीतिक हस्तक्षेप
पंडित ने बताया कि आबादी से सटी यूआईटी की सरकारी जमीनों पर कब्जे करवाने में ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा और भाजपा नेता तख्तसिंह शामिल हैं। उनका दावा है कि विरोध करने पर उन्हें भी चंदन सिंह के माध्यम से हिस्सा देने का प्रलोभन दिया गया। पंडित ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य पट्टों का विरोध नहीं है, बल्कि वर्ष 2022 के आदेशानुसार केवल पहले से कब्जाधारियों को पट्टे मिलना चाहिए।
सरकार और प्रशासन की भूमिका
मदन पंडित ने कहा कि तत्कालीन गहलोत सरकार ने 1 अप्रैल 2022 को 1800 बीघा जमीन ग्राम पंचायतों के नाम की थी, लेकिन प्रशासन की लापरवाही से पट्टे जारी नहीं हुए। उन्होंने मांग की कि प्रशासन को सर्वे कराकर सत्यापित कब्जाधारियों को पट्टे देने चाहिए और 2022 के बाद अवैध कब्जाधारियों को जिम्मेदार ठहराया जाए।
स्थानीय नेताओं और सरपंचों की प्रतिक्रिया
बेदला सरपंच निर्मला प्रजापत ने कहा कि जनता को ही फायदा मिलना चाहिए और बयानबाजी से काम नहीं बनेगा। पूर्व पार्षद अजय पोरवाल ने कहा कि 2022 के बाद के कब्जाधारियों को पट्टे मिलना गलत है और न्याय होना चाहिए। मदन पंडित ने निष्कर्ष निकाला कि पेराफेरी में पट्टों को लेकर चल रहे आंदोलन का असली उद्देश्य जनता को भ्रमित करना और भूमाफियाओं की सुरक्षा करना है। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रशासन को स्पष्ट निर्देश के तहत अवैध कब्जाधारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
