आसियान समिट में मोदी-ट्रम्प की मुलाकात नहीं होगी, जयशंकर मलेशिया जाएंगे
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कुआलालंपुर, 23 अक्टूबर: आसियान समिट 26-28 अक्टूबर को मलेशिया में होने वाला है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बार व्यक्तिगत रूप से हिस्सा नहीं लेंगे। इसके बजाय भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर उपस्थित रहेंगे। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने इसकी जानकारी साझा की और बताया कि मोदी ऑनलाइन शामिल होंगे।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मोदी के मलेशिया न जाने पर कहा कि इसका कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प हैं। रमेश का दावा है कि मोदी ट्रम्प के सामने सीधे नहीं आना चाहते। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर किसी नेता की तारीफ करना अलग है, लेकिन सामने मिलना और फोटो खिंचवाना राजनीतिक जोखिम पैदा कर सकता है।
मोदी अब तक 12 बार आसियान समिट में शामिल हो चुके हैं। 2020 और 2021 में समिट वर्चुअल था, और अब यह पहली बार होगा जब पीएम सीधे नहीं जाएंगे। समिट में ट्रम्प सहित कई विश्व नेता मौजूद रहेंगे।
आसियान की स्थापना 1967 में दक्षिण-पूर्व एशियाई पांच देशों द्वारा की गई थी, जिनमें मलेशिया, इंडोनेशिया, थाईलैंड, फिलीपींस और सिंगापुर शामिल थे। बाद में वियतनाम, ब्रुनेई, लाओस, म्यांमार और कंबोडिया भी सदस्य बने। भारत ने 2022 में CSP (कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप) साइन की थी, जिससे रक्षा, आर्थिक और तकनीकी सहयोग बढ़ाया गया।
विशेषज्ञ निरंजन ओक के अनुसार आसियान की नींव उस दौर में पड़ी जब अमेरिका और सोवियत यूनियन के बीच शीत युद्ध चल रहा था। 1990 के दशक में शीत युद्ध के बाद नए सदस्य शामिल हुए और क्षेत्रीय आर्थिक साझेदारी को बढ़ावा मिला। भारत ने 1997 में FTA और 2014 में अपनी नीति को लुक ईस्ट से एक्ट ईस्ट में अपग्रेड किया, जिससे आसियान देशों के साथ व्यापारिक और रणनीतिक संबंध मजबूत हुए।
