तीन शहरों के नाम बदले, अब गांवों पर बहस तेज
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अटपटे और चौंकाने वाले नामों को लेकर उठी नई चर्चा, उदयपुर संभाग के भी कई गांवों के नाम बदलने की आवश्यता
सुभाष शर्मा
उदयपुर, 1 मार्च: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार शाम बजट रिप्लाई में प्रदेश के तीन शहरों—माउंट आबू का नाम ‘आबूराज’, जहाजपुर का ‘यज्ञपुर’ और कामां का ‘कामवन’—करने की घोषणा की। इसके साथ ही प्रदेशभर में सैकड़ों ऐसे गांवों के नामों पर बहस छिड़ गई है, जिन्हें लोग अटपटे या चौंकाने वाले मानते हैं।
हालांकि प्रशासनिक स्तर पर गांवों के नाम बदलने की प्रक्रिया जटिल है और बिना ग्राम सभा प्रस्ताव व सरकारी अधिसूचना के बदलाव संभव नहीं। फिलहाल शहरों के नाम परिवर्तन के बाद गांवों के नामों पर भी सामाजिक बहस तेज हो गई है।
इस मामले में पंजाब केसरी ने कई लोगों से चर्चा की, जिसमें सभी की राय एकमत थी कि जो नाम अटपटे हैं और भारतीय सभ्यता और संस्कृति से मेल नहीं खाते उनके नाम बदले जाने चाहिए। शिक्षाविद एवं ख्यातनाम अंक ज्योतिषाचार्य दिनेश दिनकर का कहना है कि अब वक्त आ गया है कि उन गांव—शहरों के अटपटे नाम बदले जाने चाहिए। कई गांवों के नाम हंसी के पात्र बने हुए हैं।
उदयपुर संभाग में भी कई नाम चर्चा में हैं। उदयपुर जिले में घोड़ी, ढोल, सोम, डाल, काट, जूड़ा, नाई, काया, बड़ी, कविता और झूठों की ढाणी जैसे गांवों के नाम बदलने की मांग समय-समय पर उठती रही है। प्रतापगढ़ में आड़, चरी, शकरकंद, बोरी; राजसमंद में गवांर, कोयल, आत्मा; बांसवाड़ा में चाचाकोटा, मूलिया, बारी, दानपुर, नादिया, कुण्डल, आसन, बोरी, मोर, घाटा, सेंड नानी और हाण्डी जैसे नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज हैं।
सवाईमाधोपुर के पढ़ाना, झोंपड़ा, डाबर, भूखा; सीकर के भगेगा, चला, कांकरा, कुली, जाना, सेवा, दायरा, नानी, शिश्यु, धर्मशाला; टोंक के लावा और घास भी चर्चा में हैं। अजमेर, अलवर, बारां, बाड़मेर, भरतपुर, भीलवाड़ा, बीकानेर, बूंदी, चित्तौड़गढ़, चूरू और डूंगरपुर में भी कई ऐसे नाम हैं जो बाहरी लोगों को चौंकाते हैं।
गंगानगर में जीबी, बीबी नाम से कई गांव
श्रीगंगानगर में 5 टीके, 12 जीबी, 24 जीबी, 16 बीबी, 29 जीबी, 41 जीबी जैसे ‘चक’ आधारित नाम आज भी प्रचलन में हैं, जबकि जोधपुर, जयपुर, जालौर और झुंझुनूं जिलों में भी डोली, भेड़, पापड़, नून, टाई जैसे नाम यथावत हैं।
आबूराज के नाम को लेकर भी चर्चा
माउंट आबू का नाम आबूराज किए जाने को लेकर लोगों में चर्चा है। उनका कहना है कि इसका मूल नाम ‘अर्बुद’ है और यही नाम रखा जाना चाहिए। पौराणिक पुस्तकों में इसका नाम अर्बुद ही बताया गया है।
