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ठंड में खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर आदिवासी बच्चे

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ठंड में खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर आदिवासी बच्चे

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सलूंबर के कराकला फला में आज तक नहीं बना स्कूल भवन, शौचालय में रखे जा रहे दस्तावेज
उदयपुर, 12 जनवरी: सरकार के “पढ़ेगा इंडिया, तभी बढ़ेगा इंडिया” जैसे नारों के बीच राजस्थान के आदिवासी अंचलों की जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश कर रही है। सलूंबर जिले के लसाडिया उपखंड की धोलिया ग्राम पंचायत के कराकला फला में स्कूली बच्चे आज भी खुले आसमान के नीचे बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। सर्दी, गर्मी और बरसात—हर मौसम में बिना स्कूल भवन के शिक्षा ग्रहण करना इन बच्चों की नियति बन गया है, जबकि विद्यालय की पाठ्य सामग्री और महत्वपूर्ण दस्तावेज शौचालयों में रखे जा रहे हैं।
स्कूल का मतलब मंदिर का प्रांगण
कराकला फला के बच्चों ने आज तक पक्का स्कूल भवन देखा ही नहीं। उनके लिए स्कूल का अर्थ माताजी का स्थानक या वडेकण माता मंदिर का प्रांगण है, जहां खुले में कक्षाएं संचालित होती हैं। कई बच्चों को यह तक पता नहीं कि पढ़ाई के लिए अलग भवन भी होता है। इस स्थिति का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर पड़ रहा है।
2012 में स्वीकृत, 2026 में भी अधूरा
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2012 में राजकीय प्राथमिक विद्यालय स्वीकृत हुआ और 2013 से संचालन भी शुरू हो गया, लेकिन 2026 आ जाने के बावजूद भवन निर्माण नहीं हो पाया। भवन के लिए टेंडर हुआ, पर प्रस्तावित जमीन आबादी से दूर होने के कारण ठेकेदार ने काम अधूरा छोड़ दिया।
अधिकारियों तक पहुंची आवाज, समाधान नहीं
ग्रामीणों ने कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई। ग्राम पंचायत ने नई जमीन का प्रस्ताव भी लिया, लेकिन राजस्व विभाग में नामांतरण प्रक्रिया लंबित होने से मामला अटका हुआ है।
एक शिक्षक, 70 छात्र
विद्यालय में करीब 70 छात्र नामांकित हैं, लेकिन केवल एक शिक्षक नियुक्त है। बैठने, पढ़ने और सामग्री रखने की समुचित व्यवस्था नहीं है। मजबूरी में बालक-बालिका शौचालयों को ही स्टोर रूम बनाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द स्कूल भवन नहीं बना, तो आदिवासी बच्चों का भविष्य गंभीर संकट में पड़ जाएगा।

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