रंगोली, दीपदान और 51 मशालों के साथ विक्रमोत्सव 2083 का भव्य आगाज़
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समाज की 20 नकारात्मक प्रवृत्तियों का प्रतीकात्मक दहन कर विक्रम संवत 2082 को दी गई विदाई
उदयपुर 11 मार्च: अखिल भारतीय नववर्ष समारोह समिति के तत्वावधान में विक्रम संवत 2083 के स्वागत और विक्रम संवत 2082 की सांकेतिक विदाई के अवसर पर नेला तालाब पाल परिसर में विक्रमोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में रंगोली, दीपदान और मशालों के माध्यम से समाज में व्याप्त नकारात्मक प्रवृत्तियों का प्रतीकात्मक विसर्जन किया गया।
इस अवसर पर 31 से अधिक मातृशक्ति ने नवसंवत्सर की आकर्षक रंगोलियाँ सजाकर प्रतियोगिता में भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान हिंदू रक्षक वाहिनी के पंकज सुखवाल की ओर से भव्य आतिशबाज़ी का आयोजन भी किया गया जिसने वातावरण को उत्सवमय बना दिया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 51 मशालों के साथ विक्रम संवत 2082 को जयघोष के साथ विदाई देने का क्रम का आगाज़ रहा। मशालों के माध्यम से समाज में फैली नकारात्मक शक्तियों का प्रतीकात्मक दहन कर नए नवसंवत्सर का स्वागत सकारात्मक संकल्पों के साथ किया गया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में नेला विकास समिति के सचिव लव वर्मा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर प्रशांत व्यास सहित अन्य गणमान्य नागरिकों ने अतिथियों का अभिनंदन किया।
अखिल भारतीय नववर्ष समारोह समिति के राष्ट्रीय सचिव डॉ. प्रदीप कुमावत ने अपने संबोधन में कहा कि इस वर्ष कार्यक्रम में विशेष नवाचार किया गया है। इसके अंतर्गत 20 मशालों के माध्यम से समाज की 20 नकारात्मक प्रवृत्तियों का प्रतीकात्मक दहन किया गया ताकि नवसंवत्सर का स्वागत सकारात्मक सोच और नए संकल्पों के साथ किया जा सके।
इन नकारात्मक प्रवृत्तियों में प्रमुख रूप से ईर्ष्या, द्वेष, अहंकार, भ्रष्टाचार, झूठ और फरेब, नारी अपमान, बलात्कार जैसी सामाजिक बुराइयाँ, नशाखोरी, पर्यावरण प्रदूषण, हिंसा, जातीय विद्वेष, सामाजिक वैमनस्य, लोभ और लालच, असंवेदनशीलता, राष्ट्रविरोधी सोच, अंधविश्वास, आलस्य, अनुशासनहीनता, नैतिक पतन और कर्तव्यविमुखता जैसे विषय शामिल किए गए।
समिति के सह-संयोजक प्रतीक कुमावत ने बताया कि यह आयोजन नेला विकास समिति सेक्टर-14 और हिंदू रक्षक वाहिनी के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मातृशक्ति की सहभागिता रही। इस अवसर पर भारतीय संस्कृति, बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ, संस्कार और राष्ट्रभक्ति जैसे विषयों पर रंगोली प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें विजेताओं को सम्मानित किया गया।
समिति के शशांक टांक ने अपने संबोधन में कहा कि लगभग चालीस वर्ष पूर्व आलोक संस्थान के संस्थापक स्व. श्यामलाल जी कुमावत ने चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को भारतीय नववर्ष के रूप में मनाने की शुरुआत की थी। आज समिति के राष्ट्रीय सचिव डॉ. प्रदीप कुमावत के प्रयासों से यह उत्सव देश के अनेक स्थानों पर मनाया जाने लगा है।
कार्यक्रम के दौरान नेला तालाब पाल परिसर में “विदा 2082” की भव्य रंगोली सजाई गई और दीपदान के माध्यम से पुराने वर्ष को श्रद्धापूर्वक विदाई दी गई। आयोजन के समापन पर हनुमान चालीसा पाठ कर राष्ट्र, समाज और विश्व कल्याण की प्रार्थना की गई। आयोजन में बड़ी संख्या में नागरिकों, युवाओं और मातृशक्ति ने भाग लेकर नवसंवत्सर के स्वागत को उत्सवमय बना दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कांता कुमावत थे। नेला विकास समिति के गणपत बाकलिया, लव वर्मा, अनिल पितलिया, चंद्र शेखर सांखला, धीरेन्द्र, प्रशांत व्यास, चंद्र प्रकाश खींची, राकेश तलेसरा, राजेंद्र जैन, प्रदीप शर्मा, अखिल भारतीय नववर्ष समारोह समिति के शशांक टांक, प्रतीक कुमावत, कमलेन्द्र सिंह पवार, भूपेंद्र सिंह भाटी, शिव सिंह सोलंकी, वीरेंद्र पालीवाल सहित गण मान्य उपस्थित थे। रंगोली मे दीपिका सेन प्रथम, मधु सुथार द्वितीय, चेल्सी दाधीच तृतीय रहे।
