राजस्थान को चाहिए तमिलनाडु जैसी स्कूल निरीक्षण व्यवस्था
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शैक्षणिक सत्र से पहले होती है भवन, बस और सुरक्षा व्यवस्था की संयुक्त जांच; विशेषज्ञों ने बताई ज़रूरत
सुभाष शर्मा
उदयपुर, 3 अगस्त:
तमिलनाडु में हर साल नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों की व्यापक जांच की जाती है। यह केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि स्कूलों की संरचनात्मक सुरक्षा, परिवहन व्यवस्था, और बाल सुरक्षा सुनिश्चित करने की एक सशक्त व्यवस्था है। इसमें जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), लोक निर्माण विभाग (PWD), ट्रैफिक पुलिस, RTO और स्थानीय प्रशासन सहित कई विभाग एक साथ मिलकर निरीक्षण करते हैं। अगर राजस्थान में भी होती ऐसी व्यवस्था होती झालावाड़ जैसी घटना सामने नहीं आती।
तमिलनाडु में कई साल सेवा दे चुके और अब उदयपुर लौटे राहुल शर्मा कहते हैं, “वहां हर वर्ष स्कूल सत्र से पहले भवन, बस और अन्य व्यवस्थाओं की गहन जांच होती है। इससे न केवल बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है बल्कि अभिभावकों का भरोसा भी बढ़ता है।”
स्थानीय सैकंडरी स्कूल के प्राचार्य ओमप्रकाश कलाल का मानना है कि, “राजस्थान सरकार को तमिलनाडु की व्यवस्था से प्रेरणा लेनी चाहिए। सालाना निरीक्षण स्कूलों में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करता है। झालावाड़ जैसी घटनाएं रोकी जा सकती हैं।”
शिक्षाविद् वीरेंद्र सिंह का कहना है कि राजस्थान जैसे बड़े राज्य में भी यदि तमिलनाडु की तर्ज़ पर समन्वित स्कूल निरीक्षण व्यवस्था लागू की जाए तो शिक्षा व्यवस्था अधिक सुरक्षित, जवाबदेह और पारदर्शी बन सकती है। सरकार यदि इसे गंभीरता से लागू करे, तो बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कई जोखिम स्वतः समाप्त हो सकते हैं।
तमिलनाडु की व्यवस्था में शामिल मुख्य बिंदु
🔹 संरचनात्मक सुरक्षा:
PWD विभाग स्कूल भवन की दीवारों, छत, बिजली फिटिंग, फर्श व बाउंड्री वॉल आदि की जांच करता है। भवन की भूकंपरोधी क्षमता और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है।
🔹 स्कूल बसों की वार्षिक जांच:
स्कूल व्हीकल रूल्स 2012 के तहत स्पीड गवर्नर, सीसीटीवी कैमरे, फायर एक्सटिंग्विशर, आपातकालीन निकासी, ड्राइवर का पुलिस व मेडिकल वेरिफिकेशन, फर्स्ट-एड किट आदि की जांच होती है।
🔹 यौन सुरक्षा और बाल संरक्षण:
DEO को निर्देशित किया गया है कि हर स्कूल में आंतरिक शिकायत समिति (ICC), शिकायत बॉक्स (‘मानवर मनसु’), तथा हर तिमाही में व्यक्तिगत सुरक्षा जागरूकता सत्र आयोजित किए जाएं।
राजस्थान में भी स्कूलों और उनकी परिवहन व्यवस्था की स्थिति
स्कूल भवनों की जांच
प्रावधान: जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा समय-समय पर स्कूल भवनों की संरचनात्मक जांच की जानी चाहिए। भवन की सुरक्षा, बिजली व्यवस्था, बाउंड्री वॉल, टॉयलेट्स, पेयजल आदि की स्थिति को देखा जाना चाहिए।
वास्तविकता: नियमित निरीक्षण की कोई तय समयावधि नहीं। अधिकांश जिलों में शिकायत मिलने पर ही निरीक्षण होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में भवनों की दशा कई जगह जर्जर पाई गई है।
- स्कूल बसों की जांच
प्रावधान: हर साल शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) द्वारा फिटनेस जांच अनिवार्य है। स्कूल बसों में फायर एक्सटिंग्विशर, फर्स्ट एड बॉक्स, स्पीड गवर्नर, GPS, CCTV कैमरा और आपातकालीन निकासी द्वार होना अनिवार्य है। ड्राइवर और सहायक का पुलिस वेरिफिकेशन आवश्यक है।
वास्तविकता: कई निजी स्कूल बसों में सुरक्षा उपकरण या तो अनुपस्थित होते हैं या अनुपयोगी। वार्षिक फिटनेस जांच की प्रक्रिया RTO द्वारा की जाती है लेकिन उस पर भी निगरानी ढीली रहती है। हाल ही में हुए कुछ हादसों ने इन लापरवाहियों को उजागर किया है।
- बाल सुरक्षा और यौन शोषण निवारण
प्रावधान: प्रत्येक स्कूल में आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का गठन जरूरी है। शिकायत पेटिका और बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता कार्यक्रम अनिवार्य हैं।
वास्तविकता: अधिकांश सरकारी व ग्रामीण निजी स्कूलों में ICC का गठन केवल नाम मात्र होता है। शिकायत पेटिका की नियमित जांच नहीं होती। बच्चों में जागरूकता की कमी बनी रहती है।
