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कमला हैरिस ने राजनीति से संन्यास लिया

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कमला हैरिस ने राजनीति से संन्यास लिया

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बोलीं- “अमेरिका का राजनीतिक सिस्टम टूट चुका है, मैं इसे ठीक करने के काबिल नहीं”
कहा, अब किसी चुनाव में नहीं उतरेंगी; किताब ‘107 डेज़’ में साझा किए अनुभव

वॉशिंगटन डीसी | 1 अगस्त
अमेरिका की पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने राजनीति छोड़ने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने बताया कि अब वे किसी भी राजनीतिक पद के लिए चुनाव नहीं लड़ेंगी, चाहे वह कैलिफोर्निया के गवर्नर का पद ही क्यों न हो। ‘द लेट शो विद स्टीफन कोलबर्ट’ में दिए इंटरव्यू में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “देश का पॉलिटिकल सिस्टम टूट चुका है और अब उसमें बदलाव लाने की मेरी क्षमता नहीं बची है।”
जनता की सेवा में बिताया जीवन
कमला हैरिस ने कहा कि उन्होंने पूरे करियर में जनता की सेवा की, लेकिन अब वे महसूस करती हैं कि सिस्टम में सुधार की संस्थानिक शक्ति कमजोर हो चुकी है। उन्होंने कहा, “मैं अपने राज्य कैलिफोर्निया से बेहद प्यार करती हूं, लेकिन अब मुझे लगता है कि मेरा संघर्ष व्यर्थ हो रहा है।”
टीवी होस्ट ने जब पूछा कि इतनी सक्षम नेता का यह कहना चिंताजनक नहीं है? तो हैरिस ने कहा कि अब वे देशभर में लोगों से मिलने जाएंगी, लेकिन वोट मांगने नहीं, बल्कि लोगों की बात सुनने के लिए।
नई किताब ‘107 डेज़’ में साझा किए राजनीतिक अनुभव
कमला की नई किताब ‘107 डेज़’ इसी साल 23 सितंबर को रिलीज होने जा रही है, जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव अभियान के 107 दिनों के अनुभव साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि, “हर रात मैं प्रार्थना करती थी कि मैंने अपनी पूरी शक्ति लगाई हो, और अपने सिद्धांतों के साथ न्याय किया हो।”
2024 के चुनाव में ट्रम्प से हारीं
कमला हैरिस ने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रम्प को चुनौती दी थी, लेकिन ट्रम्प ने 312 इलेक्टोरल वोटों के साथ जीत दर्ज की, जबकि हैरिस को 226 वोट मिले। इस हार के बाद से ही वे सक्रिय राजनीति से दूर रहीं और अब उन्होंने पूर्ण रूप से संन्यास लेने का निर्णय लिया है।
वकालत से लेकर व्हाइट हाउस तक का सफर
कमला हैरिस का राजनीतिक सफर 1990 में जिला अटॉर्नी बनने से शुरू हुआ। वे बाद में स्टेट अटॉर्नी, फिर सीनेटर और अंततः अमेरिका की पहली महिला उपराष्ट्रपति बनीं।
2004 में उन्होंने एक चर्चित केस में मौत की सजा की मांग नहीं की थी, जिससे पुलिस और राज्य सरकार के कुछ वर्गों ने उनकी आलोचना की। फिर भी, वे सुधारवादी दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ती रहीं।
शिक्षा और सामाजिक सुधार के लिए काम
कमला ने ‘बैक ऑन ट्रैक’ नामक कार्यक्रम शुरू किया, जिसमें छोटे अपराध करने वालों को शिक्षा और रोजगार प्रशिक्षण दिया जाता था। उन्होंने ट्रूएंसी (बच्चों को स्कूल न भेजने) के खिलाफ भी सख्त रुख अपनाया, जिससे खासतौर पर ब्लैक समुदाय के पेरेंट्स प्रभावित हुए। हालांकि, इस पर आलोचना के बावजूद उन्होंने बताया कि ट्रूएंसी केस में 33% की गिरावट आई।

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